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इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट

इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2026–2030 का राष्ट्रीय विमोचन 3 सितंबर

‘इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2026–2030’ का राष्ट्रीय विमोचन 3 सितंबर को नई दिल्ली में फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (FIP) और NielsenIQ BookData के सहयोग से किया जाएगा

एआई, डिजिटल बदलाव, भारतीय भाषाओं और नई वितरण व्यवस्था के बीच 2030 तक प्रकाशन उद्योग की संभावनाओं का होगा आकलन

नई दिल्ली, 2 सितंबर 2026:

भारत के प्रकाशन उद्योग के आकार, संरचना, बदलाव और भविष्य की संभावनाओं का व्यापक आकलन प्रस्तुत करने वाली ‘इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2026–2030’ का राष्ट्रीय विमोचन 3 सितंबर को नई दिल्ली में फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (FIP) और NielsenIQ BookData के सहयोग से किया जाएगा। यह रिपोर्ट देश के पुस्तक प्रकाशन क्षेत्र को आंकड़ों और शोध के आधार पर समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

वर्ष 2022 में जारी की गई इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट के बाद यह नया संस्करण भारतीय प्रकाशन उद्योग को 2030 तक प्रभावित करने वाले प्रमुख बदलावों और अवसरों पर केंद्रित है। रिपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डिजिटलीकरण, ई-बुक और ऑडियोबुक, नई वितरण प्रणालियों, भारतीय भाषाओं में बढ़ते प्रकाशन तथा वैश्विक प्रकाशन जगत में भारत की बढ़ती भूमिका का विश्लेषण किया गया है।

रिपोर्ट में प्रिंट और डिजिटल प्रकाशन के साथ-साथ स्कूल, उच्च शिक्षा, ट्रेड और शोधपरक प्रकाशन क्षेत्रों के रुझानों का अध्ययन किया गया है। इसके अलावा प्रकाशन उद्योग के आर्थिक प्रभाव, रोजगार सृजन, तकनीकी बदलाव, कॉपीराइट एवं लाइसेंसिंग, नीति-निर्माण और आने वाले वर्षों में विकास की संभावनाओं का भी आकलन किया गया है।

इस अध्ययन में व्यापक उद्योग अनुसंधान, विभिन्न हितधारकों से परामर्श और बाजार संबंधी सूचनाओं को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य प्रकाशकों के साथ-साथ नीति-निर्माताओं, निवेशकों, शिक्षण संस्थानों, तकनीकी कंपनियों, लेखकों, पुस्तक विक्रेताओं और पुस्तकालयों को निर्णय लेने के लिए विश्वसनीय और तथ्यपरक आधार उपलब्ध कराना है।

फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स के उपाध्यक्ष और इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2026–2030 के प्रोजेक्ट लीडर प्रणव गुप्ता ने कहा कि भारत की बौद्धिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक प्रगति में प्रकाशन उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े और रणनीतिक क्षेत्र के भविष्य की योजना केवल अनुमान या अनुभव के आधार पर नहीं बनाई जा सकती।

“विश्वसनीय आंकड़े और निरंतर शोध प्रकाशन उद्योग के लिए आवश्यक हैं। यह रिपोर्ट केवल एक रिपोर्ट नहीं, बल्कि उद्योग के लिए एक साझा तथ्यात्मक आधार तैयार करने का प्रयास है, जिसके माध्यम से विकास, निवेश, कॉपीराइट, तकनीक, शिक्षा, भारतीय भाषाओं, निर्यात और सार्वजनिक नीति जैसे विषयों पर अधिक प्रभावी चर्चा की जा सके।”

NielsenIQ BookData, India & GCC के कार्यकारी निदेशक विक्रांत माथुर ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और जटिल प्रकाशन बाजारों में से एक है। देश का विशाल बाजार, जनसांख्यिकीय विविधता, शिक्षा व्यवस्था, भाषाई विविधता और तकनीक का बढ़ता उपयोग नए अवसर पैदा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट प्रिंट और डिजिटल से लेकर शिक्षा, भारतीय भाषाओं, एआई, नीति और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक उन प्रमुख शक्तियों को समझने में मदद करेगी, जो 2030 तक भारतीय प्रकाशन उद्योग की दिशा तय करेंगी।

राष्ट्रीय विमोचन के बाद रिपोर्ट के निष्कर्षों को फ्रैंकफर्ट बुक फेयर 2026 सहित अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन जगत के विमर्श में भी सामने लाए जाने की उम्मीद है। इससे वैश्विक प्रकाशकों, तकनीकी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और निवेशकों को भारत के प्रकाशन बाजार और उसकी अंतरराष्ट्रीय संभावनाओं को अधिक स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलेगी।

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